Tuesday, 21 June 2016

तुम   जीवन की  साथी  बनो तो सही 

एक  प्यार की  कहानी  बनो तो  सही 
लोग पढ़  लगे  तुमसे सबक प्यार का 
प्रीत  की  पाठशाला  बनो तो सही 


बहुत दर्द सहे  हमने अपने प्यार पर 
बंदिशे  कब निभी  मेरे  जज्बात पर 
 आपने  पर  हमे  बेवफा  जब कहाँ 
आँख नम  गई  आखरी  बात  पर 


Wednesday, 8 June 2016

आलोचन

आलोचना -
                   जब किसी की  प्रशंसा करनी हो तो सब के सामने करे और आलोचन  करना पड़े  तो एकांत में करे।   जब आलोचना करनी  पड़  जाये  तो  सार्वजनिक  रूप से बचे   । व्यक्ति  कितना भी बड़ा या   छोटा  क्यों न हो  उस  से अकेले में ही  बात करे ।  सार्वजनिक रूप से के गई आलोचना  अपमान  में  बदल जाती  है । और एकांत  में   गई आलोचना  अच्छी सलाह  बन जाती है 

Tuesday, 17 May 2016

हार को साथ हर दम सभाले हुये 
पास रहता नहीं यू  कोई जीत  कर 
उन  अभागे छड़ो की  संमीक्षा न हो 
आँख जब एक उदासी का घर   हो गई 
चुप  रहे हम सदा कुछ न बोले कभी 
चुपिया  फिर गुनाहों  का स्वर  हो गई 
न्याय का  कब  कोई  है एक  आधार है 
याचना  हर  घडी  यातना  जन्म  भर  

Sunday, 15 May 2016

सांस के युद्ध  में  मन पराजित  हुआ
याद की  अब कोई राजधानी नहीं
प्रेम तो जन्म से प्रड़यहीन  है
बात  लेकिन  कभी हमने मानी  नहीं
हर नए युग  तुम्हारी प्रतीक्षा  रही
हर  घडी शुम समय से अधिक  देख कर
 


भावुकता का सूरज निशदिन चढ़ता और उतरता है
याद का  चंदा  नियमित आकर ठंडी आहे भरता है
जीवन तुम तक सीमित  होकर पूरी दुनिया जैसी  है
तुमसे बाहर आकर अपनी  छाया  से  भी  डरता  है
प्यार  दुनिया मै  ही  हमने  अपनी  दुनिया बोई  है
एक तुम्हारे  पीछे  हमने अपनी  सुधबुध  खोई  है 

Friday, 22 April 2016

मंत्रणा  कोई भी सफल न हो सकी
प्रीत  को  तो समर  में उतरना ही   था
हारना  प्रेम में सब अमर कर गया
जीत जाता प्रणय   फिर तो मरना
हार  को सांस  हर दम संभाले  हुये
पास रहता नहीं यूं  कोई जीत कर

Monday, 11 April 2016


ले चलो उस दिशा जिस दिशा जिंदगी  भीड़ में न हो न अकेले रहे
कल्पना  में तुम्हे  हर घडी  सोच कर
कल्पना से निकलना  है रहना भी है 
प्यार  को जानना  जीतने  से कठिन
प्यार लांछन  भी है  प्यार गहना  भी है
उम्र  उलझन  हुई   कोई हल भी नहीं
और तुम   एक  अभुजी  पहली ही रहे

स्वपन में एक  दुनिया है  हम भी जहां
सुख से सोते है और  सुख से   जागते भी है
जब से तुम  हो गए  पूरी  दुनिया को प्यारे हो  भी गये  प्यारे लगते भी है
जिसको भाया  नहीं साथ अपना  कभी
वो न दुसमन  रहे न ही   दोस्त रहे

सुख का आधार न  सुख का संसार है
सुख का संसार न  दुःख का आधार है
 दुःख की  लेकिन  कोई  तो कसौटी   रहे

भाग्य  रेखा में  गर  प्रीत  का घर  न हो
जीने की फिर वो  रेखा भी छोटी  रहे

जिंदगी से  अधिक  प्यार से प्यार को
रोकते भी न थे   लांघते  भी  न थे

इतना आगे निकल आएंगे प्यार  में
सोचते भी न थे जानते  भी न थे

हाथ के रेखाओं से जाकर परे
हाथ में हम ने तेरे हाथ को भी धरे
भाग्य  का हर लांछन  सहना तो है
धार  विपरीत  है ,फिर भी बहना तो है

प्यार  की  हर  कहानी का अभिशाप  तो है
संग रहना न हो पर बिछड़ना  तो  है


Wednesday, 6 April 2016

एक भरम सौप कर तुम  चले तो गए
हर जनम वो भरम अब निभाना तो है
जिस कहानी में हम तुम कही भी न थे
उस कहानी को अपना बताना तो है

स्वर्ग को चाहना फिर तुम्हे  सोचना
क्या है  बेहतर यदि जब कही सोचते है
स्वर्ग मिल जायेगा इतने काबिल तो है
तुम भी मिल जाओगे हम नहीं सोचते है

आस होना अलग पास होना अलग
सोचकर हम अलग राह पर आ गए

Tuesday, 8 March 2016

भाग्य  रेखाओ में तुम कही भी न थे
प्राण के पार लेकिन  तुम्हे देख कर
सास के युद्ध में मन पराजित हुआ
याद की  अब कोई  सीमा   नहीं
प्रेम तो  जनम  से  ही प्रय्लीन हें
बात लेकिन कभी  हमने मानी नहीं
हर नय युग तुम्हरी प्रतीक्षा  रही
हर खड़ी  हम समय से अधिक देख के
 की एक तरफ आश के कुछ दीये  जल  उठे
एक तरफ  टूटे  मन के गीत गाने को हे

 प्रिय्सजन  कुछ  भी पता न चला  प्यार आता ही या सिर्फ जाने को हे
जो सहिज हे गए तुम  हमरे बिना हम वो  जीवन तुम्हरे संग ही  सीख  कर