Friday, 22 April 2016

मंत्रणा  कोई भी सफल न हो सकी
प्रीत  को  तो समर  में उतरना ही   था
हारना  प्रेम में सब अमर कर गया
जीत जाता प्रणय   फिर तो मरना
हार  को सांस  हर दम संभाले  हुये
पास रहता नहीं यूं  कोई जीत कर

Monday, 11 April 2016


ले चलो उस दिशा जिस दिशा जिंदगी  भीड़ में न हो न अकेले रहे
कल्पना  में तुम्हे  हर घडी  सोच कर
कल्पना से निकलना  है रहना भी है 
प्यार  को जानना  जीतने  से कठिन
प्यार लांछन  भी है  प्यार गहना  भी है
उम्र  उलझन  हुई   कोई हल भी नहीं
और तुम   एक  अभुजी  पहली ही रहे

स्वपन में एक  दुनिया है  हम भी जहां
सुख से सोते है और  सुख से   जागते भी है
जब से तुम  हो गए  पूरी  दुनिया को प्यारे हो  भी गये  प्यारे लगते भी है
जिसको भाया  नहीं साथ अपना  कभी
वो न दुसमन  रहे न ही   दोस्त रहे

सुख का आधार न  सुख का संसार है
सुख का संसार न  दुःख का आधार है
 दुःख की  लेकिन  कोई  तो कसौटी   रहे

भाग्य  रेखा में  गर  प्रीत  का घर  न हो
जीने की फिर वो  रेखा भी छोटी  रहे

जिंदगी से  अधिक  प्यार से प्यार को
रोकते भी न थे   लांघते  भी  न थे

इतना आगे निकल आएंगे प्यार  में
सोचते भी न थे जानते  भी न थे

हाथ के रेखाओं से जाकर परे
हाथ में हम ने तेरे हाथ को भी धरे
भाग्य  का हर लांछन  सहना तो है
धार  विपरीत  है ,फिर भी बहना तो है

प्यार  की  हर  कहानी का अभिशाप  तो है
संग रहना न हो पर बिछड़ना  तो  है


Wednesday, 6 April 2016

एक भरम सौप कर तुम  चले तो गए
हर जनम वो भरम अब निभाना तो है
जिस कहानी में हम तुम कही भी न थे
उस कहानी को अपना बताना तो है

स्वर्ग को चाहना फिर तुम्हे  सोचना
क्या है  बेहतर यदि जब कही सोचते है
स्वर्ग मिल जायेगा इतने काबिल तो है
तुम भी मिल जाओगे हम नहीं सोचते है

आस होना अलग पास होना अलग
सोचकर हम अलग राह पर आ गए