मंत्रणा कोई भी सफल न हो सकी
प्रीत को तो समर में उतरना ही था
हारना प्रेम में सब अमर कर गया
जीत जाता प्रणय फिर तो मरना
हार को सांस हर दम संभाले हुये
पास रहता नहीं यूं कोई जीत कर
प्रीत को तो समर में उतरना ही था
हारना प्रेम में सब अमर कर गया
जीत जाता प्रणय फिर तो मरना
हार को सांस हर दम संभाले हुये
पास रहता नहीं यूं कोई जीत कर