Tuesday, 21 June 2016

तुम   जीवन की  साथी  बनो तो सही 

एक  प्यार की  कहानी  बनो तो  सही 
लोग पढ़  लगे  तुमसे सबक प्यार का 
प्रीत  की  पाठशाला  बनो तो सही 


बहुत दर्द सहे  हमने अपने प्यार पर 
बंदिशे  कब निभी  मेरे  जज्बात पर 
 आपने  पर  हमे  बेवफा  जब कहाँ 
आँख नम  गई  आखरी  बात  पर 


Wednesday, 8 June 2016

आलोचन

आलोचना -
                   जब किसी की  प्रशंसा करनी हो तो सब के सामने करे और आलोचन  करना पड़े  तो एकांत में करे।   जब आलोचना करनी  पड़  जाये  तो  सार्वजनिक  रूप से बचे   । व्यक्ति  कितना भी बड़ा या   छोटा  क्यों न हो  उस  से अकेले में ही  बात करे ।  सार्वजनिक रूप से के गई आलोचना  अपमान  में  बदल जाती  है । और एकांत  में   गई आलोचना  अच्छी सलाह  बन जाती है