आलोचना -
जब किसी की प्रशंसा करनी हो तो सब के सामने करे और आलोचन करना पड़े तो एकांत में करे। जब आलोचना करनी पड़ जाये तो सार्वजनिक रूप से बचे । व्यक्ति कितना भी बड़ा या छोटा क्यों न हो उस से अकेले में ही बात करे । सार्वजनिक रूप से के गई आलोचना अपमान में बदल जाती है । और एकांत में गई आलोचना अच्छी सलाह बन जाती है
जब किसी की प्रशंसा करनी हो तो सब के सामने करे और आलोचन करना पड़े तो एकांत में करे। जब आलोचना करनी पड़ जाये तो सार्वजनिक रूप से बचे । व्यक्ति कितना भी बड़ा या छोटा क्यों न हो उस से अकेले में ही बात करे । सार्वजनिक रूप से के गई आलोचना अपमान में बदल जाती है । और एकांत में गई आलोचना अच्छी सलाह बन जाती है
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