एक भरम सौप कर तुम चले तो गए
हर जनम वो भरम अब निभाना तो है
जिस कहानी में हम तुम कही भी न थे
उस कहानी को अपना बताना तो है
स्वर्ग को चाहना फिर तुम्हे सोचना
क्या है बेहतर यदि जब कही सोचते है
स्वर्ग मिल जायेगा इतने काबिल तो है
तुम भी मिल जाओगे हम नहीं सोचते है
आस होना अलग पास होना अलग
सोचकर हम अलग राह पर आ गए
हर जनम वो भरम अब निभाना तो है
जिस कहानी में हम तुम कही भी न थे
उस कहानी को अपना बताना तो है
स्वर्ग को चाहना फिर तुम्हे सोचना
क्या है बेहतर यदि जब कही सोचते है
स्वर्ग मिल जायेगा इतने काबिल तो है
तुम भी मिल जाओगे हम नहीं सोचते है
आस होना अलग पास होना अलग
सोचकर हम अलग राह पर आ गए
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