सांस के युद्ध में मन पराजित हुआ
याद की अब कोई राजधानी नहीं
प्रेम तो जन्म से प्रड़यहीन है
बात लेकिन कभी हमने मानी नहीं
हर नए युग तुम्हारी प्रतीक्षा रही
हर घडी शुम समय से अधिक देख कर
भावुकता का सूरज निशदिन चढ़ता और उतरता है
याद का चंदा नियमित आकर ठंडी आहे भरता है
जीवन तुम तक सीमित होकर पूरी दुनिया जैसी है
तुमसे बाहर आकर अपनी छाया से भी डरता है
प्यार दुनिया मै ही हमने अपनी दुनिया बोई है
एक तुम्हारे पीछे हमने अपनी सुधबुध खोई है
याद की अब कोई राजधानी नहीं
प्रेम तो जन्म से प्रड़यहीन है
बात लेकिन कभी हमने मानी नहीं
हर नए युग तुम्हारी प्रतीक्षा रही
हर घडी शुम समय से अधिक देख कर
भावुकता का सूरज निशदिन चढ़ता और उतरता है
याद का चंदा नियमित आकर ठंडी आहे भरता है
जीवन तुम तक सीमित होकर पूरी दुनिया जैसी है
तुमसे बाहर आकर अपनी छाया से भी डरता है
प्यार दुनिया मै ही हमने अपनी दुनिया बोई है
एक तुम्हारे पीछे हमने अपनी सुधबुध खोई है
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