Monday, 11 April 2016


ले चलो उस दिशा जिस दिशा जिंदगी  भीड़ में न हो न अकेले रहे
कल्पना  में तुम्हे  हर घडी  सोच कर
कल्पना से निकलना  है रहना भी है 
प्यार  को जानना  जीतने  से कठिन
प्यार लांछन  भी है  प्यार गहना  भी है
उम्र  उलझन  हुई   कोई हल भी नहीं
और तुम   एक  अभुजी  पहली ही रहे

स्वपन में एक  दुनिया है  हम भी जहां
सुख से सोते है और  सुख से   जागते भी है
जब से तुम  हो गए  पूरी  दुनिया को प्यारे हो  भी गये  प्यारे लगते भी है
जिसको भाया  नहीं साथ अपना  कभी
वो न दुसमन  रहे न ही   दोस्त रहे

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