हमने कब सोचा था, इतनी नजदीकी बढ़ जाएगी
हमने कब सोचा था, किस्मत ये सूरत गढ़ जाएगी
उसने ही मिलवाया हमको की उसका ही उपकार था
की जिसने हमको दूर किया था वो भी अपना प्यार था
मै अपने हिस्से का जीवन कब से जीना भूल गया गया
अमृत बाटे फिरता थ मै ,अमृत पीना भूल गया
ये ऐसा वरदान था जिसमे मरना ही उपहार था
की जिसने हमको दूर किया था वो भी अपना प्यार था
क्या तस्वीर बनानी थी और क्या तस्वीर बना डाली
खाली पन भरते भरते हम ,रह गये खुद खाली खाली
रंग बिरंगे सपनो का भी ,फीका सा वो उपहार था
की जिसने हमको दूर किया था वो भी अपना प्यार था
तुम संग देखे सपनो का हर दर्पण उजला उजला था
मुझको क्या मालूम था मै एक बदनाम सफर पर निकला था
मेरी आखो के आगे तो निश्छल सा संसार था
की जिसने हमको दूर किया था वो भी अपना प्यार था
मैने अपने दीपो में बस एक तुम्हारा नूर रखा
जब की तुमने मुझको अपने साये से भी दूर रखा
मुझको जो रोगी करता था तुमको वो उपचार था
की जिसने हमको दूर किया था वो भी अपना प्यार था
मैने अपना मै खोया और खुदा को तुमसे जोड़ दिया
तुमने लेकिन अपनी मै ने सारा ही सम्बल तोड़ दिया
सम्बल भी ऐसा जो पूरे रिश्ते का आधार था
जिसने हमको दूर किया था वो भी अपना प्यार था
हमने कब सोचा था, किस्मत ये सूरत गढ़ जाएगी
उसने ही मिलवाया हमको की उसका ही उपकार था
की जिसने हमको दूर किया था वो भी अपना प्यार था
मै अपने हिस्से का जीवन कब से जीना भूल गया गया
अमृत बाटे फिरता थ मै ,अमृत पीना भूल गया
ये ऐसा वरदान था जिसमे मरना ही उपहार था
की जिसने हमको दूर किया था वो भी अपना प्यार था
क्या तस्वीर बनानी थी और क्या तस्वीर बना डाली
खाली पन भरते भरते हम ,रह गये खुद खाली खाली
रंग बिरंगे सपनो का भी ,फीका सा वो उपहार था
की जिसने हमको दूर किया था वो भी अपना प्यार था
तुम संग देखे सपनो का हर दर्पण उजला उजला था
मुझको क्या मालूम था मै एक बदनाम सफर पर निकला था
मेरी आखो के आगे तो निश्छल सा संसार था
की जिसने हमको दूर किया था वो भी अपना प्यार था
मैने अपने दीपो में बस एक तुम्हारा नूर रखा
जब की तुमने मुझको अपने साये से भी दूर रखा
मुझको जो रोगी करता था तुमको वो उपचार था
की जिसने हमको दूर किया था वो भी अपना प्यार था
मैने अपना मै खोया और खुदा को तुमसे जोड़ दिया
तुमने लेकिन अपनी मै ने सारा ही सम्बल तोड़ दिया
सम्बल भी ऐसा जो पूरे रिश्ते का आधार था
जिसने हमको दूर किया था वो भी अपना प्यार था
These lines are written by poet Aman Akshar. Stop posting it as yours
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