पालकी की एक सजी रह गई आंख में
तुम किसी पालकी में विदा हो गई
मैं किसी द्वार बारात ले आया था
गूंज शहनाइयों की मगर खो गई
हम जहां से जुदा हो गए मोड वो
देखता रह गया दृश्य ये गौर से
हम प्रणय सूत्र में बंध गए तो मगर
मैं किसी और से तुम किसी और से
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