एक अधूरी कहानी को बल मिल गया
हम मिले न किसी और से जिस तरह
अपने मिलने के वैसे संजोग है
एक होने की धुन में उलझते गये
ये भी सोचा न हम दो अलग लोग है
हम बर्ष दो बर्ष की मोहब्बत में ही
एक अनोखे से अहसास को पा गये
हम बिछड़ते समय खूब रोये जहाँ
फूल देखो उसी डाल पर आ गये
हम गलत मान कर छोड़ आये जिन्हें
वक़्त को उन सवालों का हल मिल गया
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